Adil Khan

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गणतंत्र दिवस: सिर्फ छुट्टी नहीं, संविधान को जानने का दिन है / theadilstudy

 गणतंत्र दिवस: सिर्फ छुट्टी नहीं, संविधान को जानने का दिन है |

नाच गाना नहीं अधिकारों को जानो 



Welcome ! to the THEADILSTUDY. दोस्तों आज हमने आने वाले 77 वे गणतंत्रता दिवस पर एक ऐसा Blog बनाने का सोच जो असल मे लोगों को समझ पाए के असल मे गणतंत्रता दिवस की महता क्या है ?


आजकल क्या होता है ?

आजकल देश मे एक विचारधारा लोगों मे आम हो गई है के जियसे 15 अगस्त पर आजादी मिली ऐसे ही इस दिन भी कि कोई नया कोई आजादी का ही काम हुआ होगा|

हमारे स्कूल, कॉलेज आदि इस दिन को सिर्फ और सिर्फ मनोरंजन का एक दिन बनाते जा रहे है | हफ्तों पहले से ही संस्थानों मे नाच - गाने, कहानिया और शायरी या क्या खिलाना है दर्शकों को इन सब की तैयारियों मे लग जाते है | ये दिन संविधान और कानूनों की महत्ता का है लेकिन लोग कानूनों की धज्जिया उड़ाकर (ट्रैफिक सिग्नल तोड़कर, भीड़ में शोर मचाकर, रूल्स इग्नोर करके) भी इस दिन को जरूर मनाएंगे | 


क्या - क्या जानना जरूरी है ? 

अगर हमे सच मे ये जानना है के गणतंत्र दिवस की महत्ता क्या है तो हमे निम्नलिखित चीज़े तो पढ़नी ही चाहिए -

  1. गणतंत्रता किसे कहते है ?
  2. हमारे देश मे गणतंत्र प्रणाली कैसी है ?
  3. सिंधु घाटी सभ्यता काल मे गणतंत्रता ?
  4. संविधान क्या होता है ?
  5. हमने संविधान के बारे मे कैसे जाना ?
  6. संविधान किसने बनाया ?
  7. संविधान मे मुख्य चीज़े क्या - क्या है ?


हमारी Team ने ये अनुभव किया है के इन मुख्य बातों का आम लोगों को पता नहीं है |
चलिए शुरू करते है और जानते |

गणतंत्रता किसे कहते है ?

जब किसी राज्य के प्रमुख यानि सर्वोच्च पद वाला व्यक्ति को खुद देश की जनता  चुनती है तो इस प्रणाली को गणतंत्रता कहते है | ये बस हमे लगता है के जो देश आजाद है उसका Head भी खुद वो देश के लोग ही चुनते होंगे दरअसल ऐसा नहीं है | आज भी कई देश है जैसे- कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड जिनका Head Of State यानि राज्य का प्रमुख ब्रिटेन के सम्राट या साम्राज्ञी है | यानि वो देश स्वतंत्र तो है मगर गणतंत्र नहीं है |

हमारे देश मे गणतंत्र प्रणाली कैसी है ?

ज राजाओं, नवाबों और अंग्रेजों के गुलाम रहने के बाद हमने असल मे जाना के हमारे मुल्क के मालिक तो हम यानि यहाँ की आम जनता है तो देश के आजाद होने के बाद भी हम किसी राजा या नवाब को देश का सर्वोच्च पद क्यू दे ?

तब हमने हमारे संविधान मे राष्ट्रपति ( देश का सर्वोच्च पद ) को जनता द्वारा 5 वर्ष के लिए चुने जाने का प्रावधान किया |  हमारे देश मे राष्ट्रपति कार्यपालिका, संविधान और देश की सेनाओ का प्रमुख है | 

यानि 15 अगस्त 1947 को  हम स्वतंत्र हुए और 26 जनवरी 1950 को हम गणतंत्र भी बने | 

( Note:- भारत की राजव्यवस्था पढ़ने के लिए देखे हमारा पिछला ब्लॉग - ‘भारतीय राजव्यवस्था 2026: सरकार के स्तर, चुनाव और नियुक्ति’

हमने हमारे देश मे संसदीय गणतंत्र प्रणाली को अपनाया है | यानि हमारा राष्ट्रपति चुना जाता है मगर उसकी शक्तियों को प्रयोग असल मे प्रधानमंत्री और उसका मंत्री मण्डल करता है | 

सिंधु घाटी सभ्यता काल मे गणतंत्रता ?

सिंधु घाटी सभ्यता के समय से ही गणतंत्रता का कुछ - कुछ अवशेष मिलते है |जब मोहनजोदड़ो का इतिहास पढ़ते है तो हम पाते यही के वहा एक सभा होती थी जिसमे अलग अलग विभागों के मुख्य लोग होते थे | वे बहुमत के द्वारा मोहनजोदड़ो के सर्वोच्च पद यानि प्रधान को चुनते थे | नगर के बारे मे कुछ भी फैसला लेना होता था तो बहुमत के आधार पर निर्णय किया जाता था | पुरातत्वविदों को वहा किसी महल या राजा के होने के अवशेष नहीं मिले है | अतः वहाँ राजतंत्र नहीं था |

संविधान क्या होता है ?

संविधान वो दस्तावेज है जिसमे कानूनों, नियमों और आदेशों को को लिखा जाता है |

 ये वो BASIC नियम हैं जो आज देश के सभी कानूनों का आधार बनते है | संविधान बताता है के देश के अधिकारियों को को क्या - क्या  शक्तियां प्राप्त है ? देश के आम लोगों के क्या क्या अधिकार है ? जनता के कर्तव्य क्या – क्या है ? सरकार को कानून कैसे बनाने चाहिए ? उसकी प्रक्रिया क्या होगी ?  प्रतिनिधियों को जनता कैसे चुनेगी ? न्याय व्यवस्था कैसे टिकेगी आदि बाते संविधान द्वारा तय की जाती है।


हमने संविधान के बारे मे कैसे जाना ?

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद भारत के मुख्य नेताओं ने अपनी स्वतंत्रता और स्वतंत्र संविधान सभा की मांग रखी। 1942 में कैबिनेट मिशन भारत आया। उसने भी इस बात को दृढ़ता दी । फिर राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपनी बैठकों में भी संविधान सभा के गठन के प्रस्ताव रखना शुरू कर दिया । और अंतिम रूप लार्ड माउंटबेटन के गवर्नर जनरल बनने के बाद संविधान सभा के सदस्यों के लिए देशभर में चुनाव होने लगे । और 9 दिसंबर 1946 को अस्थाई अध्यक्ष के रूप में  डॉ सच्चिदानंद सिन्हा कि अध्यक्षता संविधान सभा की पहली बैठक हुई। उसके बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी को स्थाई अध्यक्ष चुना गया।

संविधान निर्माण कार्य 26 नवम्बर 1949 तक चला,  दिन को हम संविधान दिवस मनाते है। और फिर 26 जनवरी 1950 को संविधान को लागू किया गया।

हमने संविधान के बारे मे कैसे जाना ?

हमारा संविधान किसी एक आदमी ने नहीं बनाया है , बल्कि संविधान सभा ने मिलकर इसे बनाया था । इस सभा मे 299 सदस्य थे, जो देश के अलग-अलग हिस्सों से चुन कर आए थे ।

अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
 ये  संविधान सभा की बैठकों को आहवाहन देना, उसका स्थगन करना इनका मुख्य काम था |

ड्राफ्टिंग कमिटी के चेयरमैन: डॉ. बी.आर. अंबेडकर
 जिन्हें आज हम संविधान का जनक कहते हैं
डॉ. अंबेडकर ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई — उन्होंने ड्राफ्ट तैयार किया, बहसों में हिस्सा लिया और संविधान को भारतीय समाज के लिए उचित बनाया। वे कानून, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र के बड़े विद्वान थे।

अन्य महत्वपूर्ण सदस्य: सरोजिनी नायडू, अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर, के.एम. मुंशी, टी.टी. कृष्णमाचारी, दुर्गाबाई देशमुखआदि |

मदद करने वाले: सर बेनेगल नरसिंह राव (B.N. Rau) ने शुरुआती ड्राफ्ट तैयार किया, लेकिन असली निर्माण और अंतिम रूप संविधान सभा ने दिया।

संविधान सभा ने 2 साल, 11 महीने और 18 दिन यानी लगभग 166 दिन की बैठकों में काम किया। 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया इसलिए इस इस दिन को संविधान दिवस, और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ — इसलिए इसे गणतंत्र दिवस कहा गया|

डॉ. अंबेडकर ने कहा था: "संविधान कितना भी अच्छा हो, अगर लागू करने वाले बुरे हों तो वो बुरा साबित होगा।" इसलिए हम सबको इसे समझना और बचाना है।

संविधान में मुख्य चीजें क्या-क्या हैं?

संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है (मूल में 395 अनुच्छेद, 22 भाग, 8 अनुसूचियां — अब संशोधनों के साथ और बढ़ गया है)। इसमें मुख्य चीजें ये हैं:

प्रस्तावना (Preamble): संविधान की आत्मा! इसमें लिखा है —

"हम भारत के लोग... भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने का संकल्प लेते हैं... और सभी नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समानता सुनिश्चित करते हैं..."

ये हमें बताती है कि संविधान का मकसद क्या है।

मौलिक अधिकार (Fundamental Rights — भाग 3, अनुच्छेद 12-35):
ये 6 अधिकार हैं, जो सरकार भी छीन नहीं सकती (कुछ शर्तों के साथ):

  • समानता का अधिकार (14-18): जाति, धर्म, लिंग से भेदभाव नहीं।
  • स्वतंत्रता का अधिकार (19-22): बोलने-व्यक्त करने की आजादी, गिरफ्तारी से सुरक्षा।
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार (23-24): बेगार, बाल मजदूरी रोकना।
  • धर्म की स्वतंत्रता (25-28): कोई भी धर्म मानो, प्रचार करो।
  • संस्कृति और शिक्षा का अधिकार (29-30): अपनी भाषा, संस्कृति बचाओ; अल्पसंख्यक स्कूल चला सकते हो।
  • संवैधानिक उपचार का अधिकार (32): अगर अधिकार छीने जाएं तो सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हो। डॉ. अंबेडकर ने इसे संविधान का "दिल और आत्मा" कहा।


मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties — भाग 4A, अनुच्छेद 51A):

1976 में 42वें संशोधन से जोड़े गए। 11 कर्तव्य हैं, जैसे:

  • संविधान का पालन करना।
  • राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान।
  • देश की एकता और अखंडता बचाना।
  • पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना।
  • ये बताते हैं कि अधिकारों के साथ कर्तव्य भी हैं।


राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत (Directive Principles — भाग 4):

सरकार को गाइडलाइन — जैसे गरीबी हटाना, शिक्षा फ्री करना, स्वास्थ्य सुधारना, गांवों को मजबूत बनाना। ये बाध्यकारी नहीं, लेकिन सरकार को इन्हें लागू करने का निर्देश है।

अन्य मुख्य बातें:

  1. संघीय व्यवस्था (केंद्र + राज्य)।
  2. स्वतंत्र न्यायपालिका।
  3. एकल नागरिकता।
  4. आपातकाल प्रावधान।

संविधान ने हमें वो ताकत दी कि हम "वंदे मातरम" गा सकें बिना डर के। इस 77वें गणतंत्र दिवस पर (थीम: 150 Years of Vande Mataram), याद रखो — संविधान हमारा है, हम इसके रक्षक हैं!


Disclaimer-

उपर्युक्त लेख मे हम किसी संस्था या व्यक्ति पर आरोप नहीं लगा रहे है के उन्होंने गणतंत्र दिवस का ये मतलब बना दिया है | हमने केवल अपने अनुभव से इन बातों को लिखा क्यूंकी हमारी Team ने बहोत रेसर्च करके ही ब्लॉग मे ये बाते डाली है | हम किसी से भी किसी विवाद का समर्थन नहीं करते हैं |

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